Thursday, 23 April 2015

शादी देर से होने या न होने ...........


जय माता दी !
गुरुदेव जी डी वशिस्ट के आशीर्वाद से ………
मित्रों आज मैं शादी देर से होने या न होने या होकर टूट जाने या शादी हो जाने के बाद वैवाहिक जीवन अच्छे से न चल पाने या शादी समय पर हो जाने और वैवाहिक जीवन अच्छे से चलने में ग्रहों के कारणों पर चर्चा करने जा रहा हूँ। यहाँ मैंने शादी से सम्बंधित कुछ बहुत बुरे योग मसलन शादी के बाद शौहर बीवी मैं झगड़ा या तलाक हो जाना या बीवी का मर जाना वगरैह का ज़िकर किया है। क्यों कि यह विषय बड़ा होने के कारण यहाँ एक ही पोस्ट में विस्तार से व्याख्या कर पाना मुश्किल है। इसलिए इसे मैंने अलग से ब्लॉग में लिखा है। आशा करता हूँ कि इसे पढ़ने में आप सब को कठिनाई नहीं होगी। असुविधा के लिए क्षमा चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है की आप सब को इससे लाभ जरूर होगा। 
लाल किताब तरमीम शुदा 1942 के अनुसार : 
दो गृहस्थियों को जुदा जुदा रखते हुये एक कड़ी से जोड़ने वाली चीज़ आम दुनियादारों की नज़र में शादी और ग्रहचाल में मंगल की ताकत का नाम रखा गया है। यही मंगल खून की कड़ी, लड़की और औरत में फर्क की कड़ी है। इसी वजह से शादी में मंगल गीत गाये जाते हैं। अगर मंगल नेक हो तो शादी खाना आबादी लेकिन अगर बद हो तो शादी खाना खराबी होगी। मंगल बद के वक्त सूरज की रोशनी में चमक न होगी। मर्द की कुण्डली में शुक्र से मुराद उसकी बीवी और औरत की कुण्डली में शुक्र से मुराद उसका शौहर होगा।
फरमान नं 8 के मुताबिक गृहस्थ की चक्की कुण्डली के खाना नं 7 में चलती है और चक्की घुमाने वाली लोहे की कीली खाना नं 8 में होती है। नीचे वाला पत्थर शुक्र (रिज़क) और ऊपर घूमने वाला पत्थर बुध (अक्ल) होते हैं।
उदहारण के तौर पर कुछ ग्रहों के शादी के योग और उनके प्रभाव (मित्रों यहाँ कुछ बातें ऐसी लिखी हैं जिन्ह ज्योतिषाचार्य आसानी से समाज जायेगे, लेकिन कुछ मित्रों को उनको समझने के लिए किसी अच्छे ज्योतिषचार्ये से संपर्क करना होगा) :

  1. दोस्ती दुश्मनी ग्रह दृष्टि वगैरह सबको नज़र में रखते हुये वर्षफल में खानावार हालत के हिसाब से जिस साल शुक्र /बुध को शनि की दोस्ती या शनि के आम दौरा का वक्त होवे तो शादी होने का योग होगा। आमतौर पर शादी का योग शुक्र से मान्य होता है। 
  2. जब बुध इन उसूलों पर शादी का योग बनावे तो भी शादी का योग होगा सिवाये बुध खाना नं 12 के। 
  3. अगर कुण्डली में शुक्र/बुध बर्बाद या मन्दे हों और स्त्री ग्रह शुक्र चन्द्र के साथ नर ग्रह बृहस्पत या सूरज या मंगल मददगार साथी या साथ साथ हों तो जिस साल शनि की मदद या उसके आम दौरे का ताल्लुक हो जावे तो भी शादी का योग या वक्त होगा। 
  4. अमूमन जिस साल शुक्र या बुध तख्त के मालिक या खाना नं 2, 10 से 12 (सिवाये बुध नं 12) में या बुध अपने पक्के घर खाना नं 7 में हो जावे लेकिन उस वक्त खाना नं 3, 11 में शुक्र के दुश्मन ग्रह (सूरज, चन्द्र, राहु) न हो या वह अपने जन्म कुण्डली में स्थित होने वाले घर में ही आ जावें तो शादी के योग बनते हैं। 
  5. शुक्र जब खाना नं 4 में हो चाहे अकेला या किसी के साथ या खाना नं 7 में शुक्र के दुश्मन ग्रह आयें हों तो शादी का कोई योग न होगा। 
  6. दिए गए शादी के सालों (22,24,29,32,39,51,60) में जिस साल सूरज चन्द्र या राहु खाना नं 2, 7 में न हों तो शादी होगी। ऐसी हालत में अगर बृहस्पत नं 7 में आ जावें तो औरत औलाद के काबिल न होगी। (ओलाद के होने के योगो के बारे में व्याख्या अलग पोस्ट में की गई है) दिए हुये सालों में शादी का योग ज़रूर है मगर शादी मुबारक (कामयाब) न होगी। शुक्र खाना नं 4 की ऐसी हालत में शादी मुल्तवी हो सकती है। 
  7. जो ग्रह शुक्र को बर्बाद करे या शुक्र खुद ऐसा मन्दा हो कि शादी के फल को गैर मुबारक साबत करे, मसलन् चन्द्र नं 1 के वक्त 24 या 27वें साल और राहु नं 7 के वक्त 21वें साल शादी मुबारक न होगी। 
  8. सूरज जब शुक्र के लिए ज़हरीला हो तो सूरज की उम्र 22वें साल शादी मुबारक न होगी। अगर शुक्र रद्दी न हो तो शादी के लिए कोई वहम न लेंगेे। मगर अकेला शनि खाना नं 6 इस शर्त से बाहर होगा। खासकर जब शुक्र भी उस वक्त नं 2 या 12 में हों। यानि उम्र का 18-19वां साल शादी के लिए गैर मुबारक होगा। 
  9. शुक्र बुध अपने जन्म कुण्डली वाले घर या नं 1, 7 में आ जावें मगर शुक्र जन्म कुण्डली के खाना नं 1 से 6 का न हो और उस वक्त नं 3, 11 में सूरज, चन्द्र, राहु न हों तो शादी का योग होगा। 
  10. जब खाना नं 2, 7 खाली हो तो बुध शुक्र ही खुद 2, 7 में आने पर, बुध शुक्र बैठे घर का मालिक ग्रह नं 2, 7 में और बुध शुक्र उसकी जगह चले जावें, मसलन शुक्र बुध नं 3 हो, मंगल नं 9 में तो 17वें साल शुक्र बुध नं 9 व मंगल नं 7 होने पर शादी का योग होगा। 
  11. औरत की कुण्डली में बृहस्पत नं 4 हो तो शादी जल्द हो जावेगी और सूरज मंगल का साथ गुरू से हो तो उसका ससुर न होगा। राहु खाना नं 1 या 7 या किसी तरह शुक्र से मिल रहा हो तो 21 साला उम्र की शादी बेमाना होगी। यही हालत सूरज शुक्र के मिलने पर 22 से 25 साला उम्र की शादी पर होगी। जिसके लिये उपाय ज़रूरी होगा। 
  12. शनि खाना नं 7 वाले की शादी अगर 22 साला उम्र तक न हो तो उसकी नज़र बेबुनियाद होगी। 
  13. बृहस्पत खाना नं 1 और नं 7 खाली हो तो छोटी उम्र की शादी मुबारक होगी। 
  14. शुक्र के दायें या बायें पापी ग्रह हो या शुक्र बैठा होने वाले घर से चैथे व 8वें मंगल या सूरज या शनि से कोई एक या इकट्ठे हो तो औरत जलकर मरे या शुक्र का फल जल जावे। ऐसी हालत में औरत का तबादला गाय से या गऊदान मुबारक होगा। 
  15. जन्म कुण्डली में शुक्र कायम या अपने दोस्तों यानि बुध, शनि, केतु के साथ साथी या दृष्टि में हो, उनसे मदद लेंवे तो औरत एक ही कायम होगी। 
  16. दुश्मन ग्रहों से शुक्र अगर रद्दी तो तादाद औरत ज्यादा। 
  17. सूरज बुध राहु साथ साथ, शादियां एक से ज्यादा मगर फिर भी गृहस्थ का सुख मन्दा। 
  18. बुध खाना नं 8 में तादाद औरत ज्यादा मगर सब औरतें जि़न्दा होवें । जितनी दफा वर्षफल में सूरज और शनि का आपस में टकराव आ जावे उतनी तादाद तक शादियां होंगी। 
  19. खासकर जब सूरज नं 6 और शनि नं 12 हो तो औरत पर औरत मरती जावे या मां बच्चों का ताल्लुक न देखे या सुख देखने से पहले ही मरती जावे। 
  20. शुक्र बुध दोनों ही नेक हालत के और मंगल नेक का साथ हो तो शादी औलाद का फल नेक व उम्दा होगा। 
मित्रो जल्द से जल्द अपनी कुंडली निकालें और देखें अगर आप की कुंडली में ऐसे योग हों तो एक अच्छे ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें और उपायों द्वारा बुरे योगों के दुश प्रभाव को कम करने का प्रयास करें और अपने जीवन को अधिक से अधिक खुशहाल बनायें। उपाय बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है और उनको अपने जीवन में उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है।
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम से अपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है।
जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 2100.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें।
आचार्य हेमंत अग्रवाल
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव
फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309
फेस बुक पेज पर आचार्य हेमंत अग्रवाल
ईमेल : pb02a024@gmail.com
सावधानी: कोई भी उपाय करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिशाचर्य से सलाह अवश्य लें।
माता रानी सब को खुशीआं दे।

Tuesday, 21 April 2015

शनि देव अशुभ होने के प्रभाव (भाग 1) .......

जय माता दी !
गुरुदेव जी डी वशिस्ट के आशीर्वाद से ……… मित्रों आज मैं शनि देव के बारे में चर्चा करने जा रहा हूँ। इस पोस्ट में मैं शनि देव के कुंडली में अलग अलग घरों में अच्छे और बुरे प्रभावों के बारे में बताऊँगा। अगर आप की कुंडली में भी ऐसे योग हों या शनि देव से सम्बंधित नीचे लिखे हुए हालत हों तो अच्छे ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें और उपायों द्वारा बुरे योगों के दुश प्रभाव को कम करने का प्रयास करें और अपने जीवन को अधिक से अधिक खुशहाल करें।
अन्य ग्रहों की अपेक्षा शनि के फल ज्यादा देर तक प्रभावी रहते है। क्योंकि शनि बहुत मंद गति से चलता है। इसका घनत्व भी और ग्रहों से अधिक है। इसलिए उसका हमारी धरती पर कार्मिक प्रभाव अन्य ग्रहों से अधिक गहरा है। बहुत से लोग शनि की प्रकृति को समझे बिना ही शनि को हौवा समझ बैठे है। वास्तव में शनि दुष्ट ग्रह नही है। जन्म कुंडली का दशम भाव भाग्य भाव है और दशमेश होने के कारण शनि भाग्य का नियंता है। भाग्य क्या है ? वह है कर्म का सम्यक फल। भाग्य भाव का अधिपति होने के कारण प्राणी मात्र को शनि उसके शुभाशुभ कर्मो का सर्वथा उचित फल देता है। यदि किसी ने कर्म ही खोटे किये है तो उसे खोटा फल मिलेगा ही। इसमें शनि का क्या दोष? उसे दुष्ट ग्रह क्यों कहा जाये? जो बबूल बोयगा उसे कांटे ही मिलेंगे।
लाल किताब में शनि को दुष्ट का कारक माना गया है। यह मान्यता ज्योतिष की परंपरागत धारणा से सर्वथा भिन्न है। किन्तु पूरी तरह सही है। दृष्टि का प्रयोजन व्यक्ति की बाह्य आकृति और रंग रूप को देखने तक ही सीमित नही है। कुछ और भी है। वह यह है -व्यक्ति के अन्तरम् में बैठकर उसके गुण दोषों का अवलोकन करना, उसके भले बुरे कर्मों को जान लेना। शनि के सन्दर्भ में लाल किताब ने 'दृष्टि ' शब्द का प्रयोग इसी अर्थ में किया है। शनि तो जातक के भले -बुरे कर्मों का तोल कर उन्ही के अनुरूप फल देता है। क्या यह कार्य भेदक दृष्टि के बिना संभव है? इस दृष्टि से देखें तो लाल किताबकार की उदभावना मौलिक ही नही, गूढ़ रहस्य्मय भी है।
शनि दुष्ट ग्रह नही है। उसके लिए दुष्ट शब्द का प्रयोग करना एक महात्मा की अवमानना करना है। वास्तव में शनि के स्वाभाव के दो पक्ष है। एक ओर तो वो मोक्षकामी त्यागी तपस्वी है। दूसरी ओर जातक के शुभाशुभ कर्मों का फलदाता है। भले बुरे के भेद से कर्मों के फल कोमल भी होते है कठोर भी। अतः शनि की प्रकृति में कोमलता भी है और कठोरता भी। लाल किताब के अनुसार शनि की कोमलता केतु है कठोरता राहु।
लाल किताब में शनि को एक विशाल सांप माना गया है जिसका सिर राहु है और पूछ केतु । इन्ही के माध्यम से शनि शुभाशुभ फल विभिन्न भावों में पहुंचाता है ।
एक, दो, तीन क्रम अनुसार केतु यदि शनि से पूर्वागत भावों में हो तो शनि शुभ फल देता है। वह सदा जातक की सहायता करता है। केतु यदि शनि से पश्चादागत भावों में हो तो शनि अति विषाक्त फल देता है। 
शनि यदि शुभका होकर 2, 5, 9, 12 भावों में स्तिथ हो तो कभी अशुभ फल नही देता ।
शनि से पूर्ववर्ती भावों में कहीं भी स्थित होकर शुक्र यदि शनि को देखे तो वह जातक के सम्बन्धियों, उसके घर और शनि द्वारा शासित वस्तुओं पर दुष्प्रभाव डालता है। 
शनि सामान्यतः बच्चों पर बुरा प्रभाव नही डालता; किन्तु गुरु - शनि या बुध - मंगल (दोनों ही नकली शनि) साथ - साथ हों तो बच्चे भी बुरे फल से प्रभावित होते है। पंचम भाव में यदि शनि बैठा हो या मंगल बुध साथ साथ हों तो बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। 
जब शनि अशुभ हो तो राहु उसके फल को वहन करता है। 
शनि किसी भी रूप से राहु या केतु के सम्बब्ध हो तो अत्यंत अशुभ हो जाता है। 
चन्द्रमा और राहु एक एक करके इकट्ठे ही द्वादश में स्थित हों तो शनि अशुभ नही रहता। इस दशा में वह शुभ भी नही होता। ऐसी स्थति में लोहे इस्पात से बनी हुई वस्तुएं और शनि से सम्बंधित अन्य वस्तुएं दान में देना हितकर होता है। 
केंद्र भावों में स्त्री ग्रहों के साथ स्थित होने पर शनि राहु केतुवत आचरण करता है और बुरे फल देता है। 
शनि अपने शत्रु ग्रहों को और स्त्री ग्रहों को साथ साथ देखता हो तो अपने शत्रु - ग्रहों के प्रभाव से विपरीत फल उत्पन्न करता है। वह दूसरे ग्रहों के फलों को इस क्रम से बिगाड़ता है ।




गुरु के भावों (9, 12) में बैठकर शनि कभी भी ख़राब फल नही देता; किन्तु शनि के घर (दशम) में बैठकर गुरु दुष्फल देता है। क्योकि दशम में गुरु नीच का होता है। दशम में मंगल शुभ होता है; किन्तु तृतीयस्थ शनि जातक को कंगाल कर देता है। राहु द्वारा शासित द्वादश में शनि अशुभ होता है।
शनि का अधिदेवता भैरो और धातु लोहा तथा इस्पात है। कोयला, पत्थर, नमक, पीपरमेंट, दाल उड़द छिलके समेत, सरसों का तेल, स्परिट और शराब शनि की वस्तुए है। लुहार, बड़ाई और मोची उसके व्यवसाय है। भैंस, मछली, सांप, बिच्छू, कौआ और चमगादड़ शनि के पशु पक्षी है। चाचा उसके सम्बन्धी है। कीकर, खजूर और जूते - मोजे शनि द्वारा शाषित होते है।
लाल किताबकार के अनुसार ज्योतिष में शनि को सांप भी माना गया हैं। सांप का नाम आते ही दिल में डर सा पैदा होने लगता है। हालांकि हर सांप ज़हरीला नही होता। शनि का सांप खज़ाने का रखवाला भी होता है। चन्द्र नगद रूपया तो शनि खजांची है। शनि के सांप के बिना गरीबी का कुत्ताा भौंकता होगा। अगर खाना नं 3 में शनि कंगाल है तो खाना नं 9 में मकान जायदाद का मालिक भी है। अगर खाना नं 6 में शनि खतरनाक ज़हरीला सांप है तो खाना नं 12 मे साया करने वाला शेषनाग भी है। दूसरे लफज़ों में, दोस्ती और दुश्मनी शनि के दोनों पहलू हैं। दरअसल शनि बद कम बदनाम ज्यादा है।
लाल किताब के फरमान नं 15 के मुताबिक:- 
'' पाप नैया न हर दम चलती, न ही माला ग्रह कुल की, 
शनि होता न मुंसिफ दुनिया, बेड़ी गर्क थी सब की'' । 
अगर शनि दुनिया का मुंसिफ न होता तो सब की बेड़ी गर्क हो जाती। मतलब यह कि दुनियावी काम काज़ चलाने के लिये शनि की ज़रूरत है। सन्यास या मकान-जायदाद, चालाकी से धन दौलत कमाने का ज़माना, 36 साला उम्र, शनि की पहचान है। 
तमाम मकानों, इन्सान की बिनाई और हरेक की नेकी और बदी का हिसाब किताब लिखने वाले एजेन्टों का मालिक, हाकिम शनि देवता ज़ाहिरा पीर है। इसी लिये कई मन्दिरों में शनि की पूजा होती है। नेक हालत में जब अपने जाती स्वभाव के असूल के मुताबिक नेक असर का हो तो बृहस्पति के घरों (खाना नं 2, 5, 9, 12) में कभी बुरा असर नही देता। शनि का ऐजण्ट केतु, उम्र की किश्ती का मल्लाह है। बुध के दायरे मे राहु केतु की तरफ से जिस कार्रवाई की लिखत लिखाई हो, शनि उस पर धर्म से फैसला करता है। नेक असर के वक्त शनि इन्सानी उम्र के 10, 19, 37 साल में उत्तम फल देता है। अगर कुंडली में एक दो तीन की तरकीब और दृष्टि के असूल पर पहले घरों में केतु हो और शनि के बाद में तो शनि एक इच्छाधारी तारने वाला सांप होगा। शनि को अगर सांप माना जाये तो उसकी दुम केतु बैठा होने वाले घर में होगी और सर उसका राहु बैठा होने वाले घर में गिना जायेगा। बृहस्पति कायम हो तो शनि एक ठंडा सर सब्ज पहाड़ होगा, खासकर जब चन्द्र भी दुरूस्त हो। बृहस्पति के घराें में शनि का असर वैद धन्वतरि की हैसियत का उम्दा होगा। हामला औरत, इकलौते या खानदान में अकेले लड़के के सामने शनि का सांप खुद अन्धा होगा और डंक न मारेगा। 
मंदी हालत के वक्त मौत का फन्दा फैलाये दिन दिहाड़े सब के सामने सरे बाज़ार कत्ल करने की तरह मंदा ज़माना खड़ा कर देगा। फकीर को खैरात देने की बजाये उल्ट उसकी झोली में माल निकाल लेगा। सब से धन की चोरी करता कराता फिर भी निर्धन ही होगा। हरेक के आगे सवाली फिर उसी पर चोट मार देना इसका काम होगा। मंदी हालत में शनि का एजेंट राहु होगा जो ज़हर का भण्डारी है।
दो या दो से ज्याद नर ग्रहों (बृहस्पति, सूरज, मंगल) के साथ शनि काबू में हो जाता है और ज़हर नही उगल सकता। जिस कदर मुकाबले पर दुश्मन ग्रहों (सूरज, चन्द्र, मंगल) का साथ बढ़ता जाये शनि और भी मन्दा हो जाता है। मंदी हालत में शनि की चीज़ों का दान मददगार होगा। 
बृहस्पति के घराें में शनि बुरा फल नही देता मगर बृहस्पति खुद शनि के घर खाना नं. 10 में नीच हो जाता है। मंगल अकेला शनि के घर खाना नं 10 में राजा है मगर मंगल के घर खाना नं 3 में शनि नगद माया से दूर कंगाल हो जाता है। सूरज के घर खाना नं 5 में शनि बच्चे खाने वाला सांप है मगर शनि के घर खाना नं 11 में सूरज उत्तम, धर्मी हो जाता है। चन्द्र के घर खाना नं 4 में शनि पानी में डूबा हुआ सांप जो अधरंग से मरे हुये को शफ़ा (सेहत) दे मगर शनि के हैडक्वाटर खाना नं 8 में, जो मंगल की मौतों का घर है, चन्द्र नीच हो जाता है। शुक्र ने शनि से आंख उधार ली है इसलिये शुक्र घर खाना नं 7 में शनि उच्च है। राहु बदी का एजेण्ट है मगर राहु के घर खाना नं 12 में शनि हरेक का भला ही करता है। केतु नेकी का फरिशता है मगर केतु के घर खाना नं 6 में शनि मन्दे लड़के और खोटे पैसे की तरह कभी न कभी काम आ ही जाने वाला मगर मन्दा ज़हरीला सांप होता है। इस तरह कुण्डली के जुदा जुदा खानों मे शनि का जुदा जुदा अच्छा या बुरा फल होता है। 
लाल किताब के मुताबिक राहु अगर मुल्ज़िम का चालान पेश करने का शहादती हो तो केतु उसके बचाने के लिये मददगार वकील होगा। दोनों के दरमियान बात का धर्मी फैसला करने के लिये शनि हाकिम, वक्त की कचहरी का सब से बड़ा जज होगा। पापी ग्रहों (राहु, केतु, शनि) ने दुनियावी पापियों गुनाहगारों को सीधे रास्ते पर लाने और गृहस्थी निज़ाम को कायम रखने के लिये अपनी ही पंचायत बना रखी है। इस बात के मद्दे नज़र रखते हुये ज़माने के गुरू और तमाम ग्रहों को पेशवा बृहस्पति ने शनि के घर खाना नं 11 में अपनी धर्म अदालत मुकर्रर की है। जहां शनि अपनी माता के दूध को याद करके, बृहस्पति का हल्फ उठाने के बाद राहु और केतु की शहादत के मुताबिक फैसला करता है। 
शनि खुद बुराई नही करता बल्कि उसके एजेण्ट राहु केतु बुराई वाले काम उसके पास फैसले के लिये लाते हैं। लिहाज़ा बुरो कामों के (बुरे) फैंसले करते करते शनि खुद बदनाम हो गया। लोग बदनाम को ही बुरा कहते हैं। अगर दुनिया में पाप न हो तो राहु कोई चालान पेश न करेगा। कर भी दे तो केतु की मदद से शनि का फैसला हक में होगा। फिर शनि को कोई बुरा भी न कहेगा।
मित्रो जल्द से जल्द अपनी कुंडली निकालें और देखें अगर आप की कुंडली में ऐसे योग हों तो एक अच्छे ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें और उपायों द्वारा बुरे योगों के दुश प्रभाव को कम करने का प्रयास करें और अपने जीवन को अधिक से अधिक खुशहाल बनायें। उपाय बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है और उनको अपने जीवन में उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है। 
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम से अपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है। 
जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 2100.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें। 
आचार्य हेमंत अग्रवाल 
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव 
फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309 
फेस बुक पेज पर आचार्य हेमंत अग्रवाल 
ईमेल : pb02a024@gmail.com 
सावधानी: कोई भी उपाय करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिशाचर्य से सलाह अवश्य लें

कमाई क़ाबलियत के मुताबिक न होन……



मित्रों आज में आप लोगों को कुछ ऐसी जानकारी देना चाहता हूँ जो एक दम अनूठी है। शायद कुछ लोग इस प्रकार सोच भी नहीं सकते की ज्योतिष हमारी जिंदगी में इतनी बडी दखल रखता है। जबकि हकीकत में बहुत बडी दखल रखता है। ज्योतिष प्रेमिओं के लिए लाल किताब अपरिचित नाम नहीं है।  ज्योतिष में विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति लाल किताब के रहस्यों पर मुग्ध हुए बिना नहीं रह सकता। जिन व्यक्तियों को ज्योतिष का हल्का फुल्का भी ज्ञान है वो जानते हैं की ग्रहों का हमारी जिंदगी में कितना बड़ा दखल है। अच्छे और उच्च हालात के ग्रहों को और भी अच्छा किया जा सकता है। जिससे उनके द्वारा मिलने बाले सुखों का भरपूर आनन्द लिया जा सके वो भी उन ग्रहों से सम्बंधित रिश्तेदारों और जीव जंतुओ की सेवा करके उनका आशीर्वाद लेकर और लाल किताब के उपाय तो इतने सरल और आसान हैं की छोटे छोटे बच्चे भी बड़ी आसानी से कर सकते हैं।
दिमाग में तकलीफ है तो किंडल के आठवें भाव में राहु पीड़ित है। बहते पानी में खोटे सिक्के बहा दीजिये, राहत मिल जाएगी। 
हृदय रोग से पीड़ित हैं तो तीसरे भाव में चन्द्रमा पीड़ित है। कुँवारी कन्याओं को हरे रंग के वस्त्र दान दीजिये। 
मास पेशिओं से पीड़ित होने का कारण यह है कि एकादश में बैठें हुए बुध देवता अशुभ फल दे रहे हैं।  कन्याओं की पूजा कीजिये, ब्राह्मण को पेठा दान में दीजिये। फ़िट्कड़ी से दांत साफ कीजिये। आराम ज़रूर मिलेगा। 
गाये को ग्रास देना, कुत्तों को रोटी देना, ब्राह्मण को पेठा देना, कन्याओं की पूजा करना, चांदी  का छल्ला पहनना, बहते पानी में सिक्के प्रवाहित करना, ऐसे छोटे छोटे उपाए बहुत से हैं जिन को अपना कर हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।  
''घर चलकर जो आवे दूजे, ग्रह किस्मत बन जाता है।
खाली पड़ा घर 10 जब टेवे, सोया हुआ कहलाता है। ''
आज में आपको अच्छी पढ़ाई लिखाई और भरपूर टैलेंट और भरपुर हिम्मती मेहनती होने के बावजूद पडाई लिखाई का फ़ायदा नहीं  मिलने के कारण और उपाए बताता हूँ ऐसा कब और कियूं होता है। 
लाल किताब में दसवें घर को किस्मत की बुनियाद का मैदान कहा है। किस्मत की बुनियाद करम होता है। कर्म की नींव पर ही भाग्य का भवन खड़ा होता है। अतः किस्मत की बुनियाद का मैदान हुआ कर्म का क्षेत्र। घर 10 को हमारी जन्म कुंडली में पिता का घर माना जाता है। मतलब काम काज की जगह व्यापार या नौकरी साथ ही हमारे पिता के हालात के विषय में जानकारी देता है।
अगर कुंडली का घर 10 सोया हो खाली हो या घर 10 में एक से ज्यादा ग्रह हों जो की आपस में शत्रु हों एक साथ बैठ जाएँ । क्यूंकि जब एक साथ आपस में दुशमनी करने बाले ग्रह एक ही घर में साथ साथ बैठ जायेंगे तो बो आपस में एक दुसरे के साथ लड़ेंगे जिस कारण से उस घर के सुखों का नाश करेंगे। जब घर 10 में ऐसा होगा तो पिता के जीवन में भी अनेक कठनाईयां परेशनियां आती हैं। उनको काम काज से सम्बंधित पूरे राजल्ट नहीं मिलते। भरपूर मैहनत करने के बाद भी अच्छे रिजल्ट नहीं मिलते। ऐसे व्यक्ति को खुद भी अपने जीवन काल में काम काज नौकरी से संतुष्टि नहीं मिलती। व्यापार ठीक से नहीं चलता । व्यापार बार बार बदलता है। व्यापार से सम्बंधित नित नयी परेशानी खडी रहती है। साथ ही ऐसा व्यक्ति नौकरी में हो तो उसके साथ काम करने वाले लोग उसे परेशान किया करते है। उच्च अधिकारी से संबन्ध तनाव पूर्ण रहते है । एसे व्यक्ति को नौकरी जल्दी जल्दी बदलनी पड़ती है। या निकाल दिया जाता है। और दूसरी नौकरी के लिए भटकना पड़ता है।
अगर आप के घर में ऐसे हालात हों तो हर दो तीन महीने में दस अंधों को खाना खिलाएं। और ध्यान रखें दस की दस आदमी होने चाहिए एक भी महिला ना हो। इये भी ध्यान रखें खाना खिलाना है खाने के लिए पैसे नहीं देने।
लेकिन अगर पिता के हालात ठीक हों और आपको अपने टेलेंट का भरपुर फ़ायदा ना मिल पा रहा हो आपका काम काज व्यापार नौकरी ठीक से ना चल रही हो तो निम्न लिखित उपाय करें।
43 दिन दो मुठठी सौंफ किसी भी सरकारी भवन की छाया में गड्ढा खोद के दबाएं ।
या दो मुठी सौंफ सरकारी भवन के अंदर रखें ।
चांदी के बर्तन में गंगा जल भर के चांदी के चार चोकोर टुकडे डाल के चांदी का ढकन लगा कर घर में स्थापित करे।
बुजुर्गों माता ,माता समान औरतों, विधवा औरतों का आशीर्वाद लेते रहे। उनकी सेवा करें।
आज मैंने उपरोक्त परेशानियों से सम्बंधित थोडे से उपाय लिखे है जिनको करके आप फ़ायदा उठा सकते है। 
मित्रो उपाय और भी बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है  और उनको अपने जीवन में उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है ।
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम से अपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है।
मित्रों यह एक सिमित पोस्ट है, यहाँ विस्तार से व्याख्या करना सम्बव नहीं है। मित्रों मै एक प्रोफैशनल एस्ट्रोलोजर हूँ। मैं अपना पूरा समय एस्ट्रोलॉजी को ही देता हूँ। जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 1100.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें।
आचार्य हेमंत अग्रवाल 
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव 
फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309
फेस बुक पर आचार्य हेमंत अग्रवाल या हेमंत अग्रवाल 
ईमेल : pb02a024@gmail.com 
सावधानी: कोई भी उपाय करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिशाचर्य से सलाह अवश्य लें। 

Monday, 20 April 2015

लाल किताब के रहस्ये, उपाए और सदाचरण .....

ग्रहों के अशुभता - जन्य दो प्रकार के होते हैं :

1. किसी भाव में बैठा हुआ ग्रह जब भाव का फल है तो तज्जन्य अनिष्ट उपचार - साध्य होता है, किन्तु
2. वही ग्रह जब स्वयं अपना फल देता है तो उसका अनिष्ट उपचार साध्य होता, वह होकर ही रहता है
ज्योतिष में जब ग्रहों के उपायों की बात होगी तो लाल किताब का नाम सबसे पहले आयेगा। कुंडली में ग्रहों की नेक या मन्दी हालत के मुताबक ही आदमी पर अच्छा या बुरा असर होता है। ग्रहों के बुरे असर से बचने और अच्छे असर को बरकरार रखने के लिये लाल किताब में उपायों का तफसील से ज़िक्र किया गया है।
लेकिन सवाल यह है, ''क्या उपायों से कोई फायदा हो सकता है?'' रात को बिजली से रोशनी करना, बिमारी को दूर करने के लिये दवा लेना, मौसम के मुताबक सर्द गर्म कपड़े पहनना..............यह सब उपाये नही तो क्या है ? दरअसल ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिये इन्सान लगातार उपाये करता रहा है । कुंडली की ग्रहचाल को दरूस्त करने के लिये लाल किताब के उपाये लाजवाब है। इन उपायों को चार किस्मों में रखा जा सकता है।
रिलीफ फॉर एवर : पहली किस्म के आम उपाये हैं जो मदद के लिये सभी कर सकते हैं। जैसे दुनियावी सुख के लिये गऊ ग्रास देना, परेशानी से बचने के लिये नारियल दरिया में बहाना, बिमारी से बचने के लिये हलवा कद्दू धर्मस्थान में देना । अचानक चोट या नुकसान से बचने के लिये सिगरेट से परहेज करना वगैरह।

लॉन्ग टाइम रिलीफ : दूसरी किस्म के उपाये कुंडली में मन्दे ग्रह की हालत के मुताबिक हैं। यानि कुंडली में देखना होगा कौन सा ग्रह किस खाने में बुरा असर दे रहा है। उसका उपाये लाल किताब के मुताबिक ही होगा। जैसे राहु खाना नं. 8 के लिए सिक्का दरिया में बहाने से, मंगल खाना नं. 8 के लिये बेवा की दुआ से, बुध खाना नं. 8 के लिये नाक छेदन से, शनि खाना नं. 6 के लिये तेल की कुन्जी पानी के नीचे तह ज़मीन में दबाने से, शनि खाना नं. 1 के लिये सुर्मा ज़मीन में दबाने से फायदा होगा।

इमीडियेट रिलीफ : तीसरी किस्म में आते हैं फौरन उपाये। जब किसी मन्दे ग्रह का कोई उपाये काम न करे तो कुछ घण्टों के अन्दर अन्दर फैसले के लिये उसका फौरन उपाये करना होगा। जैसे सूरज के लिये गुड़, मंगल के लिये रेवड़ियां, बुध के लिये तांबे का पैसा, राहू के लिये कोयला दरिया में बहाना मददगार होगा।

एक और उदहारण के लिए मान लीजिये किसी जातक की कुंडली में बुध के द्वारा चन्द्रमा पीड़ित हो रहा है तो उसे फेफड़ों के रोग हो जाने की सम्भावना होती है, उसकी माँ भी बीमार रहने लगेगी, इस के लिए तीन उपाए बताये गए हैं,

1. कुल देवी/देवता की पूजा करें, बड़ों के पांव छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें,

2. कुँआरी कन्यों को हरे रंग के वस्त्र दान दें, रात के समय दूध न पियें,

3. रात को सोते समय बर्तन में पानी बर कर सिराहने रख लें, सुबह वह पानी कीकर की जड़ में डाल दें,

चौथी किस्म में ऋण पित्री के उपाये आते हैं । इनकी ज़रूरत बहुत कम पड़ेगी । ऋण पित्री से मुराद कुण्डली वाले पर अपने बज़ुर्गों के पाप का खुफिया असर होता है। यानि गुनाह तो कोई करे मगर उसकी सज़ा कोई और भुगते। मगर भुगतेगा उस गुनाह को करने वाले का असल करीबी ताल्लुकदार ही। जैसी करनी वैसी भरनी। कुंडली में जो ग्रह खाना नं. 9 में बैठा हो, उसकी जड़ में बुध बैठ जाये या किसी ग्रह की जड़ में दुश्मन ग्रह बैठ जाये और साथ में वो खुद भी किसी दूसरे खाने में मन्दा हो जाये तो कुंडली पर बज़ुर्गों के पाप का बोझ होगा। जिसका उपाये जुदा जुदा हालत में जुदा जुदा होगा। जो खानदान के सब मैंम्बरों को साथ लेकर करना पड़ेगा।

आम तौर पर उपाये की मियाद कम से कम 40 दिन और ज्यादा 43 दिन लगातार होगी। मगर खानदान की बेहतरी के उपाये की मियाद लगातार की बजाये हफतावार होगी।

जैसा कि मैंने अपने पहले लेखों में लिखा है कि लाल किताब उर्दू ज़बान में गैबी ताकत से लिखी गई थी। जिसको समझने के लिये सोच भी गैबी चाहिये। यह किताब गागर में सागर समेटे हुये हैं। फरमान नं. 6 के मुताबिक शक्की हालत के ग्रह के बुरे असर से बचने के लिये शक्क का फायदा उठाया जा सकता है। मगर पक्की हालत के ग्रह का असर हमेशा के लिये मुकर्रर हो चुका है और उसके बुरे असर को तबदील करना इन्सानी ताकत से बाहर होगा। सिर्फ खास खास खुदा रसीदा और महदूद हस्तियां ही लेख में मेख लगा सकती हैं। लेकिन इसका भी कोई न कोई तबादला दिया गया। मन्दी ग्रह चाल को दरूस्त करके फायदा लिया जा सकता है। मगर यह दरूस्ती सबके बस की बात न होगी।

काबलियत और कोशिश के बावजूद अगर नतीजा हक में न आये या बिना वजह जहमत गले लगी रहे तो मदद के लिये कुंडली में किस्मत के ग्रह की तलाश करनी होगी। जो ग्रह रूकावट डाले उसका 
उपाये करना होगा तांकि ज़िन्दगी को बेहतर बनाया जा सके।
नारियल
जब ग्रहों के उपायों की बात होगी तो लाल किताब का नाम सबसे पहले आयेगा और जब उपायों की मुताल्लका अश्या की बात होगी तो नारियल का नाम सबसे पहले आयेगा। नारियल के पेड़ आमतौर पर समुंदरी किनारे वाले इलाको में पाये जाते हैं। भारत के अलावा नारियल दूसरे कई मुल्कों में भी पाया जाता है। जब नारियल कच्चा होता है तो उसका रंग हरा सा और पानी से भरा होता है। दक्षिण भारत में नारियल पानी आम पीया जाता है। जब पक जाता है तो इसका रंग भूरा सा और अन्दर का कुछ पानी गिरी में तबदील हो जाता है और जब नारियल सूख जाता है तो लक्कड़ सा बन जाता है।
आज से 25-30 साल पहले उत्तर (शुमाल) भारत में नारियल केवल (फक्त) अक्तूबर के महीने करवाचौथ के व्रत पर ही मिलता था। मगर अब यह सारा साल मिलता रहता है। नारियल का इस्तेमाल धर्म स्थान में, पूजा पाठ में, खाने पीने में और ग्रहों के उपायों में होता है। जहां तक उपाय की बात है नारियल को पापी ग्रहों से जोड़ा गया है। लिहाज़ा खानावार पापी ग्रहों के उपायों के लिए नारियल का दान देना, धर्म स्थान में रखना और नदी या दरिया में बहाना मददगार होता है। ग्रहण के वक्त नारियल चलते पानी में बहाना एक कारगर उपाय है। खासकर उनके लिये जिनकी कुण्डली में ग्रहण लगा हुआ हो। कुण्डली में सूरज और चन्द्र ग्रहण पापी ग्रहों से ही लगता है।
नारियल राहु की अश्या है। कुण्डली में अगर मंगल शनि मुश्तर्का हो तो मसनुई राहु उच्च और सूरज शनि मुश्तर्का हो मसनुई राहु नीच होगा। इसी तरह शुक्र शनि मुश्तर्का हों तो मसनुई केतु उच्च और चन्द्र शनि मुश्तर्का हों तो मसनुई केतु नीच होगा। मसनुई हालतों शनि मौजूद है। वैसे भी राहु और केतु, शनि के ऐजण्ट हैं और तीनो का पापी टोला कहा गया है। इसलिए पापी ग्रहों का उपाय नारियल से किया जाता है। परेशानी, मन्दी सेहत, आंखों की तकलीफ, जिस्मानी दर्द, रूपये पैसे की तंगी, राज दरबारी उलझन और ग्रहण की मन्दी हालत के वक्त नारियल के उपाय से फायदा लिया जा सकता है।
मित्रो उपाय और भी बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है और उनको अपने जीवन में 
उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है ।
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम सेअपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है।
मित्रों यह एक सिमित पोस्ट है, यहाँ विस्तार से व्याख्या करना सम्बव नहीं है। मित्रों मै एक प्रोफैशनल एस्ट्रोलोजर हूँ। मैं अपना पूरा समय एस्ट्रोलॉजी को ही देता हूँ। जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 1100.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें।
आचार्य हेमंत अग्रवाल
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव
फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309
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Tuesday, 7 April 2015

खाना नंबर 4 - गर्भ स्थापना एवं माता की गोद ......


जय माता दी !गुरुदेव जी डी वशिस्ट के आशीर्वाद से ………
मित्रों आप सब को आचार्य हेमंत अग्रवाल का नमस्कार। मित्रों मैं आप सब का धन्यवाद करता हूँ कि आप सब समय निकाल कर मेरे आर्टिकल्स पड़ते हैं और उनसे अधिक अधिक लाभ उठाते हैं। अगर आप सब को आर्टिकल्स में किसी सब्जेक्ट के बारे में और अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो आप निसंकोच मुझसे संपर्क कर सकते हैं। जो कि मुझे आर्टिकल्स को और भी बेहतर बनाने में उत्साहित करेगा। मित्रों अगर आप की ज़िंदगी में कोई भी समस्या चल रही है और आप उससे निजाद पाना चाहते है तो मुझे ज़रूर लिखें और मैं पूरी कोशिश करूंगा कि उसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी आप लोगों को मुहैया करवा सकूँ।
मित्रों आज मैं खाना न 4 की व्याख्या करने जा रहा हूं जिसे लाल किताब में माता की गोद कहा है |
चतुर्थ भाव
चतुर्थ भाव का स्वामी चन्द्रमा है। इस भाव का कारक भी चन्द्रमा है। लाल किताब ने चन्द्रमा को माता माना है। ज्योतिष शास्त्र में भी चन्द्रमा माता का कारक है। इसी कारण चतुर्थ को मातृ भाव की संज्ञा दी गयी है।
चतुर्थ भाव केंद्र भावों में से एक है। लाल किताब में केंद्र भावों को बंद मुठी के भाव कहा गया है। यह अत्यंत रोचक विषय है। लाल किताब में हथेली के विभिन्न भावों के स्थान माने गए है। अंगुलियों से ठीक नीचे ह्रदय - रेखा से घिरे हुए स्थान पर अनामिका की जड़ में प्रथम भाव, कनिष्टिका की जड़ में सप्तम और मध्यमा की जड़ में दसवें भाव का स्थान है। चतुर्थ भाव का स्थान कलाई के बिलकुल पास में हथेली के गुद्दे पर है। मुट्ठी बंद करने पर 1 ,7 ,10 ही मुट्ठी के भीतर आते है। चन्द्रमा का सिंहासन तो मुट्ठी से बाहर रह जाता है। फिर भी चतुर्थ को बंद मुठी का भाव कहने का कारण यह है कि इस भाव के द्वारा गर्भस्र्त शिशु का विचार किया जाता है। माता की गोद, पेट का जमाना। शिशु को अपने भीतर बंद किये हुए गर्भाशय बंद मुठी ही तो है।
गर्भावस्था के समय तीनों नर ग्रह (सूर्य, मंगल, गुरु) चन्द्र माता की शरण में होते है। उसका मित्र बुध भी मदद करता है। फलतः गर्भस्थ शिशु पूर्णतः सुरक्षित रहता है।
“तीनों मित्र ग्रह नर शरण माता की, पेट अंदर कुल पलता हो।”
इस किलेबंदी के रहते हुए राहु केतु जैसे परम पापी भी गर्भ का कोई अनिष्ट नही कर पाते। जो भी ग्रह चतुर्थ भाव में बैठा होता है, वह चन्द्रमा के समान हो जाता है। इसका प्रभाव चन्द्रमा के सामान ही होता है -
“ग्रह चौथे हो जो कोई बैठा, तासीर चन्द्र वो पाता है।
असर मगर हो उस घर जाता, शनि जहां टेवे बैठा हो।”
यदि चतुर्थ स्तिथ ग्रहों में से किसी का अशुभ प्रभाव हो तो वह उस घर में चल जाता है, जिसमे शनि देव विराजमान हों। चन्द्रमा रात्रि बलि होता हे । इसलिए जन्म कुंडली में चतुर्थ में जो भी ग्रह विधमान होते है ,वे रात्रि बलि हो जाते है -
“ग्रह चौथे का रात को जागे, या जागे मुसीबत में।”
चतुर्थ में कोई ग्रह अकेला हो और उसका सहायक कोई न हो तो वह बुढ़ापे में शुभ फल देता है -
“मदद कोई हो न जब करता है, आ तारे वो बुढ़ापे में”
चतुर्थ भाव खाली हो और चन्द्रमा केंद्र के घरों से बाहर हो तो भी सब ग्रहों का फल उत्तम होता है, चाहे चन्द्रमा रद्दी ही क्यों न हों -
“खाली होते चौथे मंदिर आखिरी उम्र तक उन्नति हो,
चन्द्र का फल दे चन्द्र, बैठा चन्द्र चाहे नष्टि हो “
छठे भाव में मंगल और राहू इकट्ठे हों तो चतुर्थ की मौत का बहाना बन जाता है -
“आठ तीजा छः टेवे मंदा, मौत बहाना चौथा हो।”
यहाँ लाल किताबकार ने भी ग्रहों के लिए संख्याओं का प्रयोग किया है। आठवाँ ग्रह राहु और तीजा ग्रह मंगल है। यहाँ भाव के नंबर की ग्रहों के नंबर से पृथकता व्यक्त करने के लिए छः के अंक (6 )का प्रयोग किया है । छटा भाव ज्योतिष शास्त्र में भी अशुभ माना गया है। यह त्रिक भावों (6 ,8 ,12 ) में से एक है ।
विवेश टिप्पणी : जब चौथे घर में अकेला ग्रह हो और चंद्रमा बंद मुट्ठी के खानों से बाहर कहीं भी बरबाद या खराब हो रहा हो तो चौथे घर का ग्रह शुभ फल होगा, चाहे वह चंद्रमा का मित्र हो या शत्रु | यह सिद्धांत मंगल बद या मांगलिक पर भी लागू होगा
 यदि चंद्रमा 8 वृश्चिक में नीच का हो या 11 वें घर मे शुन्य (निरपेक्ष या मंदा) हो, चौथे घर वाला ग्रह शुभ फल होगा
लाल किताब तरमीम शुदा (1942) में लिखा है : 
"ग्रह चैथे के रात को जागे,या जागे वह मुसीबत में।
मदद कोई न हो जब करता, आ तारे वह बुढ़ापे में ।।"
कुण्डली के खाना नम्बर 4 को लाल किताब में माता की गोद व पेट का ज़माना कहा गया है। माता का ताल्लुक दिल, दूध, धन-दौलत, कुदरती तौर पर तबीयत का झुकाव क्या होगा। शान्ति सुभाओ, सर्द तर पानी जैसा (मानिन्द पानी) होगा। व्यक्तिगत लिखी हुई बात (तहरीर जाती), माता का पेट, जिस्मानी हालत का असर, घोड़ा, दूध वाले चारपाये, आबी या पानी के जानवर, माता का खानदान, मासी फूफी का मकान, खाली तह ज़मीन, धरती माता, समन्दर पार या समन्दर का सफ़र, खुशी, बृहस्पत का धन, हौंसला, रस या फलों के रस , बजाजी कपड़े का काम, रूहानी ताकत मुताल्लिका सूरज, वक्त जवानी, साथ लाई हुई चन्द्र की चीज़ें, धन, मर्दों का ताल्लुक, रूहानी कारोबार, (उत्तर-पूर्व स्थान) शुमाल मशरिक, बृहस्पत, सूरज, चन्द्र जैसे हों वैसा ही फल होगा। शुक्र मंगल बद या मंगलीक, केतु राशि फल के होंगे। ग्रह का असर मानिन्द रफ्तार केकड़ा होगा यानी ग्रह का असर केकड़े की गति जैसा होगा। यह मैदान (सहन) है खाना नम्बर 10 का और इस घर का न्यायकर्ता (मुन्सिफ) सनीचर होगा।
चन्द्र खाना नम्बर 4 का मालिक है। दूध का सफेद चन्द्र, राहु केतु इस घर में पाप छोड़ने का हलफ लिये होते हैं यानी पाप न करने की कसम खाते हैं। यह भी संभव है कि उनके चुप रहने से लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है
 जैसे दंड देने का अधिकारी यदि शरारती को न डांटे तो अत्याचार और भी बड जाता है
जिस तरह रात को जागने वाले आंख के होशियार होते हैं, उसी तरह ही इस घर के ग्रह रात को जागने या अपना असर रात को दिया करते हैं या वह ग्रह आखिरी वक्त जब कोई मददगार न हो, मदद दिया करते हैं। बुढ़ापे में तो खासकर मदद करते हैं।
इस घर में चाहे सनीचर ज़हरीला सांप और मंगल जला हुआ मगर राहु केतु धर्मात्मा ही रहेंगे या यूं कहो कि चुप होंगे और पाप न करेंगे। चन्द्र बन्द मुट्ठी (खाना नम्बर 1,4,7, 10) से बाहर चाहे रद्दी हो और उस वक्त खाना नम्बर 4 खाली हो तो चन्द्र का नेक असर होगा। नम्बर 4 में कोई भी अकेला ग्रह हो और चन्द्र बन्द मुट्ठी से बाहर मन्दा हो रहा हो तो नम्बर 4 वाला ग्रह नेक असर ही देगा। अपने घर खाना नम्बर 4 में चन्द्र खर्चने पर और बढ़ने वाला आमदन का दरिया होगा। माता के आर्शीवाद से माया की लहर बहर होगी।
मित्रो जल्द से जल्द अपनी कुंडली निकालें और देखें अगर आप की कुंडली में ऐसे योग हों तो एक अच्छे ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें और उपायों द्वारा बुरे योगों के दुश प्रभाव को कम करने का प्रयास करें और अपने जीवन को अधिक से अधिक खुशहाल बनायें। उपाय बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है और उनको अपने जीवन में उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है।
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम से अपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है।
जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 2100.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें।
आचार्य हेमंत अग्रवाल
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव
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सावधानी: कोई भी उपाय करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिशाचर्य से सलाह अवश्य लें। माता रानी सब को खुशीआं दे।

Saturday, 4 April 2015

कम उम्र में बच्चों का झुकाव सैक्स की तरफ


जय माता दी !
गुरुदेव जी डी वशिस्ट के आशीर्वाद से ………

कम उम्र में बच्चों का झुकाव सैक्स की तरफ
मित्रों में आज जियोतिष का एक ऐसा पहलू आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ जो अन्य अस्ट्रोलॉजर्स ने हमेशा नजर अंदाज किया है। पर में इस पहलू को नजर अंदाज नहीं करना चाहता क्यूंकि अगर जड़ मजबूत ना होगी तो पेड़ स्थिर कैसे रहेगा।
सैक्स की तरफ बच्चों का झुकाव 12 से 15 साल की उम्र के बीच में होना शुरू हो जाता है कारण शरीर में हार्मोन्स परिवर्तन। लेकिन अगर बच्चे की कुंडली में साथ ही माता पिता की कुंडली में भी केतु देव बुरे हाल या नीच के हों तो बच्चे में 12 से 15 साल की उम्र में फालतू का भटकाव शुरू हो जायेगा। किउंकि 12 से 15 साल का अरसा केतु का पक्का अरसा होता है। ऐसे समय में बुध देव भी बुरे नीच के बैठे हों तो बच्चे के अंदर अपना और अपने घर परिवार के लिए भला सोचने की ताकत ख़राब हो जाती है। और उनके मन में भटकाव पैदा हो जाता है। जिस कारण उन्हें बुरी सोच के मित्र मिलते हैं। ऐसे बच्चों को अपने आस पास का माहौल ही बुरा और बुरे लोगों का साथ मिलता है। साथ ही जिन माता पिता की कुंडली में भी बुध देव नीच के मंदे या बुरे हालात में हों तो उनको अपनी बहन बेटियों की तरफ से ज्यादा परेशानी आती है। क्यूंकि नर औलाद का कारक ग्रह केतू और कन्या औलाद का कारक ग्रह बुध है। केतु अच्छे हालात में हों तो नर औलाद के सुख और अच्छी मान सम्मान साथ हो औलाद की भी तरक्की होती है। बच्चों में फालतू का भटकाव नहीं होता। अगर बुध देव अच्छे हालात में हों तो ऐसा व्यक्ति भरपूर चंट चालक होता है। उसको अपने जीवन में बहन बेटियों की तरफ से कोई परेशानी नहीं होती उनसे भरपूर प्रेम बना रहता है। लेकिन जिन बच्चों की कुंडली में बुध बुरे हाल नीच के हों तो बो अपनी समझ का सही इस्तेमाल नहीं कर पाते और उनमे कम उम्र में ही भटकाव शुरू हो जाता है। उन्हें आसानी से उनके संगी साथी ही भटकाने का कम करते हैं। उनको अपने आस पास स्कूल में गन्दा माहौल मिलता है और ऐसे बच्चे ऐसे माहौल में घुल मिल जाते हैं। और सैक्स की तरफ आकर्षित होने लगते हैं। उनमे जिददी पन बढ़ता जाता है। स्कूल से भागते हैं। सिनेमा मॉल में अपने अपोजिट सैक्स के दोस्तों के साथ घुमते हैं। पढ़ाई लिखाई चौपट हो जाती है। घर परिवार का मान सम्मान ख़राब होता है। बच्चे में फालतू की भाग दौड़ शुरू हो जाती है। बच्चा झूठ बोलने लगता है। जिस कारण बच्चा अपना भविष्य खुद ही अपने हाथों ख़राब कर लेता है।
अमूमन जिन बच्चों को उपरोक्त परेशानियां होतीं हैं उनकी कुंडली में शुक्र देव भी बुरे हालात में होते हैं। शुक्र के साथ उनके दुश्मन ग्रह सूर्य राहू और शनि देव हों या राहू देव घर 7 में भी बच्चों को कम उम्र में सैक्स की तरफ धकेलते हैं। अकेला राहू 7 ही बच्चे को बुरी और नेगेटिव सोच देने के लिए काफी है। राहू घर 7 में बहुत गन्दी सोच देता है। राहू 7 बाला व्यक्ति रिश्ते और उम्र का लिहाज भी नही करता। जिस कारण बच्चे में सैक्स की तरफ झुकाव जल्दी ही और कम उम्र में हो जाता है।
1-उपरोक्त हालात में केतु देव के उपाय करके बच्चे को फालतू के भटकाव से रोका जा सकता है।
2-बुध देव के उपाय से बच्चे को अपना भला बुरा समझने में आसानी होगी।
3-शुक्र देव जिस ग्रह से ख़राब हो रहे हों उसको उपाय करके ठीक करें।
बच्चे को मॉरल स्पोर्ट दें।
चांदी के बर्तन में गंगा जल भरके 4 चांदी के चौकोर टुकड़े डाल के घर में रखें जिससे चंद्र देव ठीक होंगे और बच्चे की मन में ठंडक और शांति आएगी।
केसर का टीका बच्चे को रोज लगबायें।

मित्रो उपाय और भी बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है । और उनको अपने जीवन में उतारकर हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते है । अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम सेअपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है। मित्रों यह एक सिमित पोस्ट है, यहाँ विस्तार से व्याख्या करना सम्बव नहीं है

अगर आप लाल किताब जियोतिष सीखना चाहते हैं। तो भी सम्पर्क कर सकते हैं।
मित्रों मै एक प्रोफैशनल एस्ट्रोलोजर हूँ। मैं अपना पूरा समय एस्ट्रोलॉजी को ही देता हूँ। जो सज्जनगन अपनी या अपने परिवार की जन्म कुंडली मुझे दिखा कर फलादेश के साथ बुरे ग्रहों की जानकारी लेना चाहता हो वह ईमेल द्वारा मात्र 500.00 रुपया में पी डी ऍफ़ फाइल द्वारा प्राप्त कर सकते है और बुरे ग्रहों के उपाय जानना चाहतें हो और लाल किताब ज्योतिष सीखने के इच्छुक हों संपर्क करें।
आचार्य हेमंत अग्रवाल
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फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309
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माता रानी सब को खुशीआं दे।

Saturday, 21 March 2015

शुक्र ग्रह से सम्बंधित जानकारी (भाग 5)

जय माता दी !
गुरुदेव जी डी वशिस्ट के आशीर्वाद से ………
शुक्र देव के बारे में चर्चा को आगे बढ़ाते हुए.………।
आठवें शुक्र को जली मिटटी की चांडाल औरत कहा गया है। आठवें शुक्र वाले की पत्नी सख्त स्वभाव की होती हैं। औरत की जुबान से निकला हर शब्द पत्थर की लकीर होगा। वी अगर किसी के लिए बुरा कहेगी तो तुरंत सच हो जाता हैं। लेकिन अछा कहने पे जरूरी नहीं। अगर ऐसा इंसान अपनी पत्नी को तंग करेगा तो शुक्र का फल दोनों के लिओए मंदा होगा। ऐसे इंसान की शादी यदि 25 वर्ष तक हो जाये तो तो बहुत अशुभ होगा। शुक्र 8 के समय यदि खाना नंबर २ खाली हो तो देखा जाता हैं की बुजर्गों का सर पे साया नहीं होता। चन्द्र - मंगल या बुध अच्छी हालत होने पे ही शुक्र का असर कम हो सकता हैं।
मित्रो अब आगे मैं आपको शुक्र देव के सुखों में परेशानी होने के एक विशेष कारण सूर्य देव के सम्बन्ध में बता रहा हूँ। सूर्य देव शुक्र को कैसे ख़राब करते हैं। मतलब शुक्र देव के सुखों को हानि कैसे पहुचाते हैं। 
  1. जैसा कि मैंने अपने पहले लेखों में लिखा है कि जब सूर्य के साथ या सूर्य की दृष्टि में शनि देव आ जाएँ तब शुक्र देव से मिलने वाले सुखों में कमी होती है। 
  2. जब सूर्य के साथ शुक्र देव एक ही घर में या किसी वर्ष फल में सूर्य की दृष्टि शुक्र देव के ऊपर पड़ रही हो तब भी शुक्र देव के सुखो में कमी हो जाती है।
  3. जब सूर्य देव शुक्र देव के पक्के घर 7 में बैठ जाएँ तब भी शुक्र देव के फलों में परेशानी होती है।
  4. जब सूर्य देव घर 12 जोकि बिस्तर के सुखों का घर है बंहा पर सूर्य देव बैठ कर शुक्र के सुखो का नाश करते हैं। क्योंकि बिस्तर के सुख का कारण शुक्र देव हैं। साथ ही शुक्र को फूल भी बोला जाता है और सूर्य तो आग का विशाल गोला है तो आग के पास फूल जल जाता है और हाँ एक बात और कि सूर्य 12 बाले जातक का जीवन साथी बिस्तर पर प्यार कम और झगड़ा ज्यादा करता है। इस प्रकार से सूर्य देव शुक्र को हानि पहुंचाते हैं।
मित्रों आप की जानकारी के लिए बताना चाहता हूँ कि शुक्र देव के सुख क्या हैं।  पति पत्नी के जितने भी सुख जैसे सम्भोग के सुख, आपसी मिजाज का अच्छा होना। घर सुंदर और घर में साज सज्जा के भरपूर सामान। साथ ही घर में लुक्सुरियस सामान की कोई कमी ना होना। अच्छे शुक्र बाले जातक का साथी वफादार होता है। वो खुद भी अपने साथी के लिए वफादार होता है। शरीर एक दम फिट होता है। शरीर में भरपूर जोश। ऐसे व्यक्ति को घूमने फिरने के शौकीन होते हैं। अपने साथी का भरपूर ध्यान रखते हैं। रुपया पैसा की कोई कमी नहीं होती और ऐसे व्यक्ति की बुद्धि भी तेज होती है।
मित्रों अब मैं आप से शुक्र देव को खुश रखने के बारे में कुछ सावधानियां बताने जा रहा हूँ। मित्रों यह केवल सावधानियां हैं पूर्ण  उपाए नहीं। जिनसे आपको फायदा जरूर होगा। तो जब आप लाल किताब के उपाय करोगे तो कितना फायदा होगा इस की कल्पना कर पाना भी मुश्किल है। 
अगर आप की जन्म कुंडली में शुक्र देव सूर्य देव के कारण खराब या बुरे फल दे रहे हैं तो निम्न लिखित सावधानियां बरतें।
  • दिन में सम्भोग कभी ना करें।
  • गुड़ का सेवन ना करें।
  • गुड़ गेंहू और ताम्बे का घर पर स्टॉक ना करें।
  • सोने बाले कमरे में साज सज्जा का सामान जरूर रखें।
  • बिस्तर कटा फटा या गन्दा ना हो।
  • बिस्तर पर खाना ना खाएं।
  • सुबह जल्दी बिस्तर छोड़ने की आदत बनाएं।
  • सुबह जल्दी नहा धो लें।
  • रोज प्रेस किये कपड़े पहने।
  • सूर्य को जल ना दें।
  • लाल रंग के कपड़े ना पहनें।
  • परफ्यूम सेंट का इस्तेमाल रोज करें।
  • घर में खुशबू का बतावरण बनाने के लिए अगरबत्ती धुप रोज जलाएं।
  • काले रंग की गाय की खूब सेवा करें।
मित्रो जल्द से जल्द अपनी कुंडली निकालें और देखें अगर आप की कुंडली में ऐसे योग हों तो एक अच्छे ज्योतिषाचार्य से संपर्क करें और उपायों द्वारा बुरे योगों के दुश प्रभाव को कम करने का प्रयास करें और अपने जीवन को अधिक से अधिक खुशहाल बनायें। उपाय बहुत सारे है । जिनको यहाँ लिख पाना संभव नही है और उनको अपने जीवन में उतारकर आप अपने जीवन को सुखमय बना सकते है।
अगर आप गुडगाँव से दूर हैं तब भी आप मुझसे फ़ोन कॉल के माध्यम से अपनी कुंडली पर फलादेश और उपाय ले सकते हैं। साथ ही हमारा संस्थान आपकी कुंडली से सम्बंधित जानकारी जैसे फलादेश और उपाय कोरियर से आपके घर तक भेज सकतें है। 
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आचार्य हेमंत अग्रवाल 
ऍफ़ ऍफ़ 54, व्यापार केंद्र, सी ब्लॉक, सुशांत लोक, गुडगाँव 
फ़ोन : 01242572165, मोबाइल : 8860954309 
फेस बुक पर आचार्य हेमंत अग्रवाल या हेमंत अग्रवाल 
ईमेल : pb02a024@gmail.com 
सावधानी: कोई भी उपाय करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिशाचर्य से सलाह अवश्य लें। 
माता रानी सब को खुशीआं दे।